रियो ओलम्पिक (तैराकी) : फेल्प्स ने जीता 20वां स्वर्ण

रियो डी जनेरियो, 10 अगस्त (आईएएनएस)| अमेरिकी तैराक माइकल फेल्प्स ने 200 मीटर बटरफ्लाई स्पर्धा के फाइनल में पहला स्थान हासिल करते हुए अपना 20वां ओलम्पिक स्वर्ण पदक हासिल किया। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, मंगलवार को 31 साल के फेल्प्स ने 1.53.36 मिनट के साथ पहला स्थान हासिल किया। रियो में यह उनका दूसरा स्वर्ण है।

जापान के मासोतो साकाई को रजत पदक से संतोष करना पड़ा और हंगरी के टामस केंडेरेसी ने इस स्पर्धा में कांस्य जीता।

साल 2012 के लंदन ओलम्पिक में फेल्प्स को हराकर इस स्पर्धा का स्वर्ण जीतने वाले दक्षिण अफ्रीका के चाड ले क्लोस इस साल चौथे स्थान पर रहे।

फेल्प्स ने इससे पहले रियो में चार गुणा 100 मीटर रिले स्पर्धा का स्वर्ण जीता था।

अमेरिकी दिग्गज तैराक अल ओएटेर (चक्का फेंक) और कार्ल लेविस (लंबी कूद) के बाद लगातार चार ओलम्पिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले तीसरे खिलाड़ी बनना चाहते हैं।

रियो ओलम्पिक में सोमवार को पूरी हुई स्पर्धाओं के बाद पदक तालिका में अमेरिकी कुल 26 पदकों के साथ शीर्ष पर हैं, जिनमें नौ स्वर्ण, आठ रजत और नौ कांस्य पदक शामिल हैं। इसके अलावा चीन दूसरे स्थान पर है।

फेल्प्स के पास कुल 25 ओलम्पिक पदक हैं, जिनमें से 21 स्वर्ण पदक हैं।

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रियो डी जनेरियो, 9 अगस्त (आईएएनएस)| भारत ने मंगलवार को रियो ओलम्पिक की हॉकी स्पर्धा के अपने तीसरे पूल मैच में अर्जेटीना को 2-1 से हराया। यह 2009 के बाद अर्जेटीना पर भारत की पहली जीत है। ओलम्पिक हॉकी सेंटर के टर्फ पर खेले गए पूल-बी के इस मैच में भारत के लिए चिंगलेनसाना कांगूजाम ने आठवें और कोथाजीत सिंह खादानबाम ने 35वें मिनट में गोल किए।

अर्जेटीना के लिए एकमात्र गोल गोंजालो पिलाट ने 49वें मिनट में किया।

अपने दूसरे मैच में भारत को जर्मनी के हाथों 1-2 से हार मिली थी। खेल खत्म होने से तीन सेकेंड पहले क्रिस्टोफर रूर ने गोल करते हुए भारत को हार पर मजबूर किया था।

भारत ने आयरलैंड पर जीत के साथ अपने अभियान का शानदार आगाज किया था लेकिन अपने से अपेक्षाकृत कमजोर आयरिश टीम के खिलाफ 3-2 की जीत बहुत प्रभावशाली नहीं थी।

भारत के खाते में अब छह अंक हैं तथा एक और जीत उसे क्वार्टर फाइनल में पहुंचा देगी। भारत अपने पूल में दूसरे स्थान पर है।

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सेंट लूसिया टेस्ट : अश्विन ने बचाई लाज, भारत के 5 विकेट पर 234 रन

सेंट लूसिया, 9 अगस्त (आईएएनएस)| रविचंद्रन अश्विन (नाबाद 75) और विकेटकीपर रिद्धिमान साहा (नाबाद 46) की बदौलत भारतीय टीम ने डारेन सैमी क्रिकेट स्टेडियम में खेले जा रहे चार तीसरे टेस्ट मैच के पहले दिन मंगलवार को पांच विकेट पर 234 रन बना लिया है। 100 रन के भीतर चार विकेट गंवाकर संकट में आ चुकी भारतीय टीम को अश्विन ने अपनी 190 गेंदों की जुझारू पारी से खूबसूरती से संवारा।

अश्विन ने पहले अजिंक्य रहाणे (35) के साथ 23.3 ओवरों की साझेदारी कर टीम को शुरुआती झटकों से उबारा और उसके बाद रिद्धिमान साहा के साथ छठे विकेट के लिए 108 रनों की नाबाद साझेदारी निभाकर उन्होंने भारत को संकट से बाहर निकाल लिया।

रहाणे के साथ उनकी साझेदारी 39 रनों की रही। साहा ने भी अश्विन का अच्छा साथ दिया और 122 गेंदों की अपनी पारी में वह चार बाउंड्री लगा चुके हैं।

इससे पहले मेजबान वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर भारत को बल्लेबाजी का आमंत्रण दिया और शेनन गाब्रियल ने कप्तान के फैसले को सही साबित करते हुए मैच के तीसरे ओवर में ही सलामी बल्लेबाज शिखर धवन (1) को चलता कर दिया। धवन का कैच विकेट के पीछे गाब्रिएल ने लिया।

इसके बाद आए कप्तान विराट कोहली (3) भी ज्यादा देर टिक नहीं सके। टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण कर रहे अल्जारी जोसेफ ने कोहली को पवेलियन भेजा। कोहली अतिरिक्त उछाल के सामने कुछ नहीं कर पाए और पहली स्लिप पर खड़े डारेन ब्रावो को कैच दे बैठे।

इसके बाद दूसरे टेस्ट मैच के शतकवीर लोकेश राहुल (50) ने एकबार फिर अपनी उपयोगिता साबित करते हुए रहाणे के साथ तीसरे विकेट के लिए 58 रनों की साझेदारी निभाई।

कैरेबियाई टीम के लिए दूसरा टेस्ट मैच ड्रॉ कराने वाले रोस्टन चेस ने राहुल की पारी का अंत किया। राहुल स्पिन के चाल में फंस कर ब्राथवेट को कैच दे बैठे। उन्होंने अपनी पारी में 65 गेंदों का सामना करते हुए छह चौके लगाए।

टेस्ट श्रृंखला की शुरुआती दो मैचों से बाहर रखे गए रोहित शर्मा (9) को इस मैच में शामिल किया गया, लेकिन वह भी कुछ खास नहीं कर सके और टीम के कुल योग में सिर्फ 10 रन जोड़कर जोसेफ का दूसरा शिकार बने।

बल्लेबाजी क्रम में पदोन्नती पाने वाले अश्विन ने इसके बाद रहाणे के साथ पारी को संभाल लिया। हालांकि चायकाल से दो ओवर पहले ही रहाणे चेस की फुल टॉस गेंद को स्वीप करने के प्रयास में चूक गए और गेंद ने उनकी गिल्लियां बिखेर दीं।

वेस्टइंडीज के लिए जोसेफ और चेस ने दो-दो विकेट हासिल कर लिए हैं, जबकि गाब्रिएल को एक विकेट मिला।

चार मैचों की श्रृंखला में भारत 1-0 से आगे चल रहा है।

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“अभी तो नापी है मुट्ठी भर ज़मीन आपने”- भारत का ओलंपिक्स इतिहास

ओलिंपिक में भारत

भारतीय ओलंपिक टीम को इस बार के ओलंपिक खेलों से काफी उम्मीदें हैं। भारत का अभी तक का ओलंपिक में प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है। कुल मिलाकर भारत को अब तक 26 मैडल मिल चुके है। भारत के प्रदर्शन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अभी तक भारत के पदकों कि संख्या दो अंको तक भी नहीं पहुंच सकी है। व्यक्तिगत खेलों में गोल्ड मेडल अभी तक केवल अभिनव बिंद्रा के खाते में ही दर्ज है। लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू खिलाड़ियों के प्रदर्शन में हो रहे लगातार सुधार की भी गवाही देता है।

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भारत ने पहली बार सन 1900 में ओलिंपिक में केवल एक खिलाडी नार्मन प्रिटचार्ड के साथ भाग लिया था और एथलिट में 2 सिल्वर तमगे हासिल किये। norman-pritchard-1430556040

हॉकी का गोल्डन पीरियड (1928-1956)

सन 1927 में ‘इंडियन ओलम्पिक एसोसिएशन’ (IOA) का गठन किया गया ताकि भारत में खेल को बढ़ावा दिया जा सके। इसी दौरान ‘इंडियन हॉकी फेडरेशन’ का भी गठन किया जा चूका था। तब पहली बार ओलंपिक्स में भारतीय हॉकी टीम को भेजा गया। 1928-1956 के सालो को भारतीय हॉकी के इतिहास में ‘गोल्डन पीरियड’ के नाम से जाना जाता है। इस दौरान भारत ने 6 सोने के तमगे हासिल किये। इसका श्रेय ध्यान चाँद जी को दिया जाता है। 1928 -1980  तक हुए 10 ओलिंपिक खेलो में भारत की हॉकी टीम का काफी दबदबा रहा है। भारत की हॉकी टीम ने अब तक कुल 11 तमगे जीते है, जिनमे 8 सोने का तमगा, 2 चांदी तथा 1 कांस्य का तमगा जीता।

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1952 में भारत को व्यैक्तिक रूप से रेसलिंग में कांस्य पदक मिला। यह पदक के. डी. जाधव को मिला था।

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1952 से 2004 एथेंस तक का सफर

1952 में हॉकी तथा रेसलिंग में दो तमगे हासिल करने के बाद के वर्षो में भारत को केवल 1 तमगे से ही संतोष करना पड़ा। इसी दौरान तीन ओलंपिक्स में तो भारत को खली हाथ भी लौटना पड़ा था। जीते गए तमगो में लीएंडर पेस को मेंस सिंगल,टेनिस में ब्रॉन्ज़ (1996); कर्णम मल्लेश्वरी को वेट लिफ्टिंग में कांस्य (2000); राज्यवर्धन सिंह राठौर को शूटिंग में सिल्वर(2004) प्राप्त हुए। इसके अलावा भारतीय हॉकी टीम ने ही सबसे ज्यादा मेडल्स पर कब्ज़ा किया।

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2008 ओलम्पिक में भारत

2008 के ओलंपिक खेलो से पहले एटलांटा, सिडनी और एथेंस में हुए तीन ओलंपिक खेलों में भारत को केवल 1-1 मेडल से संतोष करना पड़ा था। वही 2008 के ओलंपिक खेलों में भारत ने 3 पदक जीते। इसी के साथ ही भारत को व्यक्तिगत खेलों का पहला गोल्ड मेडल भी मिला। अभिनव बिंद्रा को शूटिंग में गोल्ड, विजेंदर सिंह को बॉक्सिंग में ब्रॉन्ज़ तथा सुशील कुमार को रेसलिंग में ब्रान्ज मिला था।

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2012 ओलिंपिक में भारत के कहते में 6 तमगे आये

साल 2012 के ओलंपिक्स डेलीगेशन में 83 सदस्यो की टीम भेजी गयी। 2012 के लन्दन ओलंपिक में खिलाडियों ने और बेहतर प्रदर्शन करते हुए 2008 में जीते गए 3 पदकों के आंकड़ों को 2012 में 6 तक पहुंचाया। वर्ष 2008, 2012 में सुशील कुमार ने रेसलिंग में दो मैडल जीत कर नार्मन प्रिटचार्ड के बाद  प्रथम भारतीय बने। हलाकि नार्मन ने दो सिल्वर तमगे जीते, वही सुशील ने एक सिल्वर और एक कांस्य पदक हासिल किया।

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2012 के ओलंपिक्स में विजय कुमार को शूटिंग में चांदी का तमगा;  सुशील कुमार ने रेसलिंग में सिल्वर पदक; गगन नारंग ने शूटिंग में कांस्य; साइना नेहवाल ने बैडमिंटन में कांस्य; मैरीकॉम ने बॉक्सिंग में कांस्य तथा योगेश्वर दत्त ने रेसलिंग फ्री स्टाइल में कांस्य पदक पर कब्ज़ा जमाया।

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रियो ओलंपिक्स, 2016

रियो ओलंपिक्स 2012, में भारत की ओर से 124 सदस्यो की टीम भेजी गयी है। हालाँकि भारत की झोली में अभी तक एक भी पदक नही आया है, लेकिन हमे गर्व है की इस बार हमारी अब तक की सबसे बड़ी टीम भेजी गयी है। हमारी शुभकामनाएं उन सभी खिलाड़ियों के साथ है जो भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे है।

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200 मी. में नया विश्व रिकार्ड बनाना चाहते हैं बोल्ट

रियो डी जेनेरियो, 9 अगस्त (आईएएनएस)| जमैका के दिग्गज धावक उसेन बोल्ट अपने अपने अंतिम ओलम्पिक में अपनी पसंदीदा 200 मीटर स्पर्धा में नया विश्व रिकार्ड कायम करना चाहते हैं। यही नहीं, दुनिया के सबसे तेज धावक बोल्ट ने 100 तथा चार गुणा 100 मीटर स्पर्धा में भी विश्व रिकार्ड कायम करने की इच्छा जाहिर की है।

बोल्ट ने बीजिंग ओलम्पिक (2008) और लंदन ओलम्पिक (2012) में इन तीन स्पर्धाओं का स्वर्ण जीता था। 100 तथा 200 मीटर का विश्व रिकार्ड बोल्ट के नाम है जबकि 4 गुणा 100 मीटर रिले का रिकार्ड जमैका के नाम है।

बोल्ट ने सोमवार को कहा, “यह मेरा अंतिम ओलम्पिक है। इसमें कोई शक नहीं। मैंने सबकुछ किया है और खुद को साबित किया है। कई लोग मेरी इस सफलता से खुश नहीं हैं। मैं अपनी तरह की विदाई चाहता हूं और इसीलिए मैं इन तीन रेसों को अपने नाम करना चाहता हूं।”

बोल्ट को 200 मीटर से खास लगाव रहा है। बोल्ट ने कहा कि वह 200 मीटर की दूरी 19 सेकेंड से के समय में नापना चाहते हैं।

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घर के पीछे शूटिंग रेंज में सब्जियां उगाऊंगा : बिंद्रा

रियो डी जेनेरियो, 9 अगस्त | भारत के लिए ओलम्पिक खेलों की व्यक्तिगत स्पर्धा में एकमात्र स्वर्ण पदक जीतने वाले निशानेबाज अभिनव बिंद्रा सोमवार को ब्राजील की मेजबानी में चल रहे रियो ओलम्पिक की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में चौथे स्थान पर रहे और पदक से चूक गए।

करियर के आखिरी ओलम्पिक में पदक के इतना नजदीक आकर चूकने के बाद बिंद्रा ने आईएएनएस से कहा, “मेरा निशानेबाजी करियर यहीं खत्म होता है, यहां तक कि शौकिया निशानेबाजी भी यहीं से खत्म होती है।”

स्पर्धा के एक घंटा बाद सहज हो चले बिंद्रा ने आराम से पत्रकारों से बातचीत की और उनके सवालों के जवाब दिए। बिंद्रा ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि वह भविष्य में क्या करने वाले हैं, लेकिन निश्चित तौर पर निशानेबाजी का उनके आने वाले कल में कोई स्थान नहीं है, यहां तक कि शौकिया भी वह निशानेबाजी नहीं करने वाले।

बिंद्रा ने कहा कि उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ किया, लेकिन पदक नहीं जीत सके।

जब उनसे पूछा गया कि घर पर शौकिया तौर पर तो वह निशानेबाजी करते ही रहेंगे तो उन्होंने कहा, “मैं अपने घर के पिछले हिस्से में सब्जियां उगाने वाला हूं।”

इस जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इस बारे में गंभीर हैं तो उन्होंने कहा, “क्या मैं आपको गंभीर व्यक्ति नजर नहीं आता।”

इस पर बिंद्रा से पूछा गया कि क्या वह खुद को कुछ ज्यादा ही सख्त दिखाने की कोशिश कर रहे हैं तो बिंद्रा ने कहा, “और मैं कर भी क्या सकता हूं। आप मुझसे क्या चाहते हैं, क्या मैं रोना शुरू कर दूं? जी हां, मैंने ठीक-ठाक प्रदर्शन किया।”

टेलीविजन चैनलों के कैमरे न होने के कारण शूटिंग अरेना के ठीक बाहर बिंद्रा बड़े सहज नजर आ रहे थे और अखबारों के पत्रकारों के साथ हंसी-मजाक भी कर रहे थे। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि 20 साल बाद पांच ओलम्पिक और तीन ओलम्पिक पदक के तो वह हकदार हैं ही।

बिंद्रा ने कहा ‘मैंने ओलम्पिक के लिए बहुत कठिन और निरंतर मेहनत की थी’ लेकिन ‘मेरा काम उतना आसान नहीं है, जितना आपका’।

बिंद्रा ने स्वीकार किया कि पदक न जीत पाना ‘थोड़ा कष्टकारी तो होता है’ लेकिन ‘यही जीवन है। खेल का यह हिस्सा है और यह खेल का पारितोषिक है’।

बीते कुछ वर्षो में लगातार चोटों से जूझने के बावजूद प्रतिस्पर्धा में बने रहने के सवाल पर बिंद्रा ने कहा, “मेरे खयाल से इसके पीछे प्रेरणा का बड़ा हाथ है। मैं अच्छा करना चाहता था और चुनौतियों से पार पाना चाहता था। मुझे खुद में विश्वास था और उम्मीद पर जी रहा था।”

बिंद्रा ने बताया कि रियो ओलम्पिक के लिए विशेष तौर पर तैयार करवाई गई उनकी बंदूक फाइनल स्पर्धा वाले दिन सुबह गिरकर टूट गई थी, जिसके कारण उन्हें वैकल्पिक बंदूक से काम चलाना पड़ा।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इससे कोई फर्क पड़ा।

पत्रकारों ने जब उनसे जोर देकर पूछा कि वह भविष्य में क्या करने वाले हैं तो उन्होंने कहा कि वह अभी ओलम्पिक खेलों का समापन भी नहीं कर सके हैं और लोग उनसे पूछने लगे हैं कि आने वाले वर्षो में वह क्या करने वाले हैं।

प्रशिक्षक का करियर चुनने के सवाल पर बिंद्रा ने कहा, “अगर मैंने प्रशिक्षण देना शुरू किया तो मेरे शिष्य दो घंटे में भाग खड़े होंगे।”

बिंद्रा ने कहा कि अभी वह इस पर विचार करेंगे कि शेष जीवन व्यतीत करने और आजीविका के लिए वह क्या करेंगे।

अबकी जब बिंद्रा से पूछा गया कि वह अपने खेल अनुभव को फिर कैसे आने वाली पीढ़ियों को देंगे तो उन्होंने कहा, “मैं अपने फाउंडेशन के जरिए पहले से ही 30 युवा निशानेबाजों की मदद कर रहा हूं। मैं उनके लिए अपना सर्वश्रेष्ठ करूंगा। युवा खिलाड़ियों के लिए मेरा यही संदेश है कि कठिन मेहनत करें, दृढ़ता बनाए रखें और सफलता हासिल करें।”

भारतीय निशानेबाजी के भविष्य के बारे में बिंद्रा ने कहा, “मैं अभी देखूंगा कि क्या हो रहा है। हो सकता है कि मैं अगली बार ओलम्पिक में पत्रकार बनकर आऊं। क्या कोई मुझे नौकरी देगा?” और वह मुस्कुराते हुए कुछ टेलीविजन पत्रकारों की ओर बढ़ गए।

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स्वीडन तैराक का 100 मीटर ‘बटरफ्लाई’ में विश्व रिकॉर्ड

रियो डी जेनेरियो, 8 अगस्त (आईएएनएस)| स्वीडन की तैराक सारा सजोस्ट्रॉम ने यहां रियो ओलम्पिक में तैराकी स्पर्धा के 100 मीटर ‘बटरफ्लाई’ वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही सारा ने एक नया विश्व रिकॉर्ड भी बनाया है। उन्होंने रविवार को हुई स्पर्धा में अपने ही 55.64 सेकंड के विश्व रिकॉर्ड को तोड़कर एक नया (55.48 सेकंड) कीर्तिमान बनाया।

समाचार एजेंसी एफे के अनुसार, सारा ने कजान में अगस्त 2015 में हुई विश्व चैम्पियनशिप में 55.64 सेकंड का विश्व रिकॉर्ड बनाया था।

सारा के बाद कनाडा की पैनी ओलेक्सीयैक ने 56.46 सेकंड के साथ रजत पदक हासिल किया। वहीं, अमेरिका की डाना वोल्मेर (56.63 सेकंड) ने कांस्य पदक हासिल किया।

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रियो ओलम्पिक (भारोत्तोलन) : चीन के भारोत्तोलक ने तोड़ा विश्व रिकॉर्ड

रियो डी जेनेरियो, 8 अगस्त (आईएएनएस/सिन्हुआ)। चीन के भारोत्तोलक लोंग किंगक्वान ने रियो ओलम्पिक की भारोत्तोलन स्पर्धा में पुरुषों के 56 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। इसके साथ ही लोंग ने विश्व रिकॉर्ड भी तोड़ा है।

चीन के 25 वर्षीय भारोत्तोलक और 2008 बीजिंग ओलम्पिक के स्वर्ण पदक विजेता ने उत्तर कोरिया के ओम युन चाओल की चुनौती को पार किया।

लोंग ने तुर्की के बलिल मुत्लु के 16 साल पहले सिडनी ओलम्पिक खेलों में बनाए रिकॉर्ड को तोड़ दिया। चीन के भारोत्तोलक ने ‘स्नैच’ में 137 किलोग्राम और ‘जर्क’ में 170 किलोग्राम का वजन उठाया। इस प्रकार से उन्होंने कुल 307 किलोग्राम का वजन उठाकर एक नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया।

स्वर्ण पदक जीतने के बाद लोंग ने कहा, “मैं काफी खुश और गौरवांन्वित हूं। मैं ओलम्पिक खेलों में दो लक्ष्य के साथ आया था। एक जीतने और दूसरा विश्व रिकॉर्ड बनाने और मैंने दोनों ही पूरे किए।”

चीन ने अब तक हुई स्पर्धाओं में कुल आठ पदक जीते हैं, जिसमें तीन स्वर्ण, दो रजत और तीन कांस्य पदक शामिल हैं।

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रियो ओलम्पिक : पदक तालिका में शीर्ष पर है अमेरिका

रियो डी जेनेरियो, 8 अगस्त (आईएएनएस)| रियो ओलम्पिक में अब तक हुए मुकाबलों में सबसे अधिक पदक जीतने वाली सूची में अमेरिका शीर्ष पर है। इस पदक तालिका में पहले 10 देशों में अमेरिका, चीन, आस्ट्रेलिया, इटली और दक्षिण कोरिया, हंगरी, रूस, ब्रिटेन, स्वीडन और जापान शामिल हैं।
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अमेरिका के पास अब तक कुल 12 पदक हैं, जिनमें से तीन स्वर्ण, पांच रजत और चार कांस्य पदक हैं। इसके अलावा, चीन के पास आठ (3 स्वर्ण, 2 रजत, 3 कांस्य), आस्ट्रेलिया के पास छह (3 स्वर्ण, 3 कांस्य), इटली के पास सात (2 स्वर्ण, 3 रजत, 2 कांस्य) और दक्षिण कोरिया के पास पांच (2 स्वर्ण, 2 रजत, 1 कांस्य) पदक हैं।

इटली के पास आस्ट्रेलिया के मुकाबले स्वर्ण पदक कम हैं और इस कारण वह पदक तालिका में पीछे है।

दक्षिण कोरिया के बाद अन्य पांच देशों में हंगरी (2 स्वर्ण), रूस (1 स्वर्ण, 2 रजत, 2 कांस्य), ब्रिटेन (1 स्वर्ण, 1 रजत), स्वीडन (1 स्वर्ण, 1 रजत), जापान (1 स्वर्ण, 6 कांस्य) हैं।

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रियो ओलम्पिक (टेनिस) : पहले मुकाबले में ही हारकर बाहर हुए जोकोविक

रियो डी जेनेरियो, 8 अगस्त (आईएएनएस)| रियो ओलम्पिक की टेनिस स्पर्धा में सर्बिया के स्टार खिलाड़ी नोवाक जोकोविक अपने पहले ही मुकाबले में बड़े उलटफेर का शिकार हुए। विश्व के 141वीं वरीयता प्राप्त खिलाड़ी जुआन माट्रिन डेल पोट्रो ने शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी को 7-6 (7-4), 7-6 (7-2) से पारिजत किया। इस हार से जोकोविक का सपना चूर-चूर हो गया और वे रियो ओलम्पिक से बाहर हो गए।

हार से निराश जोकोविक कोर्ट से वापसी के दौरान काफी भावुक नजर आए। हालांकि, जीत की खुशी से पोट्रो की आंखों में आंसू देखे गए।

जोकोविक के लिए शायद उनके करियर की यह सबसे बड़ी हार हो कि रियो ओलम्पिक में उनका सफर शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया।

बीजिंग ओलम्पिक-2008 में जोकोविक ने कांस्य पदक जीता था। हालांकि, अर्जेटीनियाई खिलाड़ी पोट्रो से सर्बिया के स्टार खिलाड़ी को लंदन ओलम्पिक-2012 में भी हार का सामना करना पड़ा था। इस कारण उनका कांस्य पदक जीतने का लक्ष्य अधूरा रह गया।

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